मनरेगा खत्म, VB-G RAM G शुरू: 1 जुलाई से बदल जाएगी गांवों की सूरत, जानें क्या है नया सरकारी प्लान।


VB-G RAM G एक्ट: ग्रामीण भारत के लिए 1 जुलाई की सुबह एक नए युग की शुरुआत लेकर आने वाली है। केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए दो दशकों से चली आ रही ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना’ (MGNREGA) को पूरी तरह से समाप्त करने का निर्णय लिया है। इसकी जगह अब देश में ‘विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन – ग्रामीण’ (VB-G RAM G) एक्ट, 2025 प्रभावी होगा। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अब ग्रामीण विकास मंत्रालय ने इसके कार्यान्वयन की तैयारी तेज कर दी है।

VB-G RAM G
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​ग्रामीण रोजगार का नया और आधुनिक ढांचा

​सरकारी सूत्रों के अनुसार, मनरेगा को केवल नाम बदलने के लिए नहीं हटाया जा रहा, बल्कि इसके पीछे एक गहरी रणनीतिक सोच है। पिछले कुछ वर्षों में मनरेगा में अकुशल श्रम और भ्रष्टाचार की बढ़ती शिकायतों के बाद सरकार एक ऐसे कानूनी ढांचे की तलाश में थी जो ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प को पूरा कर सके। VB-G RAM G इसी सोच का परिणाम है। यह नया एक्ट न केवल रोजगार की गारंटी देता है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी संपत्तियों के निर्माण पर जोर देता है जो आने वाले दशकों तक गांव की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करें।

​अब 100 नहीं बल्कि 125 दिन के काम की कानूनी गारंटी

​इस नए कानून के तहत सरकार ने ग्रामीण परिवारों को दी जाने वाली सालाना रोजगार गारंटी को 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया है। यह 25 प्रतिशत की वृद्धि ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी उन्मूलन की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार का उद्देश्य है कि साल के चार महीने ग्रामीण परिवार पूरी तरह से आय के मोर्चे पर सुरक्षित रहें। इससे न केवल परिवारों की क्रय शक्ति बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण बाजारों में मांग और आपूर्ति का नया चक्र शुरू होगा।

​किसानों के लिए राहत: 60 दिनों का ‘नो-वर्क’ ब्रेक

​अक्सर ग्रामीण इलाकों में बड़े किसान यह शिकायत करते थे कि सरकारी कामों की वजह से खेती के सीजन में मजदूर नहीं मिलते। इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए VB-G RAM G में एक विशेष प्रावधान किया गया है। अब साल के 60 दिन (बुवाई और कटाई के मुख्य सीजन) ‘नो-वर्क पीरियड’ घोषित किए जाएंगे। इन दो महीनों में सरकारी निर्माण कार्य बंद रहेंगे, जिससे कृषि कार्यों के लिए आसानी से श्रमिक उपलब्ध हो सकेंगे। यह पहली बार है जब किसी रोजगार योजना को सीधे तौर पर कृषि के हितों के साथ जोड़कर बनाया गया है।

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​मजदूरी से कौशल विकास का सफर

​नए एक्ट का सबसे दिलचस्प हिस्सा इसका कौशल विकास (Skill Development) मॉडल है। अब मजदूरों को केवल मिट्टी ढोने या गड्ढे खोदने के काम तक सीमित नहीं रखा जाएगा। योजना के तहत श्रमिकों को निर्माण, जल प्रबंधन, और तकनीकी कार्यों का बुनियादी प्रशिक्षण दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में इन मजदूरों को ‘अर्ध-कुशल’ श्रेणी में लाकर उनकी दैनिक मजदूरी की दर में भी इजाफा किया जा सके। इससे ग्रामीण युवाओं में आत्म-सम्मान बढ़ेगा और वे अपने ही गांव के विकास में तकनीकी रूप से योगदान दे पाएंगे।

​चार मुख्य वर्टिकल्स पर आधारित होगा विकास

​VB-G RAM G एक्ट को चार विशेष क्षेत्रों में बांटा गया है। इसमें सबसे ऊपर ‘जल सुरक्षा’ को रखा गया है, जिसके तहत वर्षा जल संचयन और सिंचाई ढांचा तैयार होगा। दूसरा स्तंभ ‘ग्रामीण बुनियादी ढांचा’ है, जिसमें सड़कों और पंचायत भवनों का निर्माण होगा। तीसरा ‘आजीविका वर्टिकल’ है, जिसमें डेयरी, मत्स्य पालन और कृषि के लिए स्थायी शेड और गोदाम बनाए जाएंगे। चौथा स्तंभ ‘क्लाइमेट रेजिलिएशन’ है, जो जलवायु परिवर्तन के खतरों से गांवों को सुरक्षित रखने के लिए काम करेगा।

​डिजिटल स्ट्रैक और भ्रष्टाचार पर सीधी चोट

​पारदर्शिता के मामले में यह एक्ट अब तक की सबसे आधुनिक प्रणाली अपनाएगा। सरकार ने इसके लिए ‘विकसित भारत नेशनल रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर स्ट्रैक’ लॉन्च किया है। अब हर काम की रियल-टाइम मॉनिटरिंग होगी। काम शुरू होने से लेकर खत्म होने तक की हर तस्वीर को जियो-टैगिंग के जरिए पोर्टल पर अपलोड करना होगा। इसके अलावा, ड्रोन के माध्यम से औचक निरीक्षण की व्यवस्था भी की गई है, जिससे फर्जी मस्टर रोल और बिचौलियों के खेल पर हमेशा के लिए लगाम लग जाएगी।

​साप्ताहिक भुगतान और अधिकारियों की जवाबदेही

​श्रमिकों के लिए सबसे अच्छी खबर यह है कि अब उन्हें अपनी मजदूरी के लिए महीनों इंतजार नहीं करना होगा। नए कानून में ‘साप्ताहिक भुगतान’ (Weekly Payment) की व्यवस्था की गई है। किसी भी स्थिति में काम पूरा होने के 15 दिनों के भीतर बैंक खाते में पैसा पहुंचना अनिवार्य है। यदि भुगतान में देरी होती है, तो डिजिटल सिस्टम खुद-ब-खुद इसकी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजेगा और देरी के लिए जिम्मेदार व्यक्ति पर जुर्माना लगाया जा सकता है। यह कदम सीधे तौर पर ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर’ (DBT) की सफलता को नए स्तर पर ले जाएगा।

​पंचायतों के हाथ में होगी गांव की कमान

VB-G RAM G एक्ट के लागू होने के बाद ग्राम पंचायतों की शक्ति कई गुना बढ़ जाएगी। ‘विकसित ग्राम पंचायत योजना’ के माध्यम से अब सरपंच और पंचायत सदस्य खुद तय कर सकेंगे कि उनके गांव के लिए कौन सा काम जरूरी है। केंद्र सरकार बजट सीधे पंचायतों के तकनीकी प्रस्तावों के आधार पर जारी करेगी। इससे विकेंद्रीकरण का सपना सच होगा और गांव अपनी जरूरतों के हिसाब से खुद का विकास मॉडल तैयार कर सकेंगे।

​ग्रामीण भारत का नया सूर्योदय

​विशेषज्ञों का मानना है कि 1 जुलाई से लागू होने वाली यह व्यवस्था ग्रामीण भारत की तस्वीर और तकदीर दोनों बदल देगी। जहां एक ओर यह रोजगार की सुरक्षा को बढ़ाती है, वहीं दूसरी ओर गांवों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करती है। मनरेगा का विदाई और VB-G RAM G का आगमन भारत के ग्रामीण सुधारों के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा।


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